Tuesday, July 14, 2020

Attitude

1.दिल में मोहब्बत का होना ज़रूरी है,
वरना याद तो रोज दुश्मन भी किया करते हैं।

2.सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी,
हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।

3.तेरी  ईगो  तो  2 दिन  की  कहानी  है
बट   मेरी  अक्कड़  तो   खानदानी  है

4.सुन पगली… 
तू मोहब्बत है मेरी इसलिए दूर है मुझसे, 
अगर जिद होती तो मेरी बाहों में होती।

5.वो खुद पे इतना गुरूर करते हैं,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो ही नहीं सकते।

6.मत करो मेरी पीठ के पीछे बात जाकर कोने में।
वरना पूरी जिंदिगी गुज़र जाएगी रोने में।

7.जहाँ कदर न हो अपनी वहाँ जाना फ़िज़ूल है, 
चाहे किसी का घर हो चाहे किसी का दिल।

8.दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी,
मैं हाथ नहीं उठाता बस नज़रों से गिरा देता हूँ।

9.अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उँगलियाँ,
जिनकी हमे छुने की औकात नहीं होती।

10.पीने पिलाने की क्या बात करते हो,
कभी हम भी पिया करते थे,
जितनी तुम जाम में लिए बैठे हो,
उतनी हम पैमाने में छोड़ दिया करते थे!!

11.एक दिन भी न निभा सकेंगे वो मेरा किरदार,
         जो लोग मुझे मशवरे देतें हैं हजार।

12.जिंदगी का असली मजा तो तब आता है,
जब दुश्मन भी आपसे हाथ मिलाने को बेताब रहे।

13.मेरा स्टाईल और मेरा Attitude 
     दोनों तेरी औकात से बाहर हैं
     जिस दिन इसे जान जायेगा,
     उस दिन जान से जायेगा

14.मेरा Attitude तो मेरी निशानी है,
     तू बता तुझे कोई परेशानी है।

15.बादशाह कोई भी हो, 
      लेकिन जहाँ हम कदम रखदें,
      वहाँ हुकूमत सिर्फ हमारी चलती है।

16.मेरा कोई क्या बिगाड़ेगा, 
      मेरी तो किस्मत ही उसने लिखी है
      जिसका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता है।

17.मैं सीधा दीखता हूँ

     तो ये मत समझना की
     मैं सीधा साधा हूँ,
     लोगो की अकड़ धुएं में उड़ा
     कर बीड़ी की तरह छोटी कर देता हूँ।

18.सुन बे,
     तेरी बदमाशी का सूरज चाहे
     कितनी भी बुलन्दियों पर चमके,
     अगर हमारी हदो में चमका तो डूब जाएगा।

19.ख्वाइशों का कैदी हूँ,
      मुझे हकीकत सज़ा देती है, 
      आसान चीजों का शौक नही, 
      मुझे मुश्किले मज़ा देती हैं।

20.भाव हम किसी को देते नही,
      और अकड़ हम
      किसी की सहते नही।

21.अपना तो बस एक ही उसूल है,
     प्यार हदसे ज्यादा, और
     नफरत उससे भी ज्यादा।

22.कोई बन्दूक से तो क्यों
      तलवार से डरता है,
     लेकिन हमारी तो आँखे ही काफी हैं
     लोगो में ख़ौफ़ फ़ैलाने के लिये।

23.अगर मेरी कोई बात तुम्हे बुरी लगे,
     तो ये सोच कर भूल जाना, 
     की तुम कौनसा मेरा कुछ बिगाड़ सकते हो।

24.खुश रहा करो उनके लिये, जो तुम्हे खुश नही देखना चाहते हैं।

25.वो मंज़िल ही बदनसीब थी जो हमे पा न सकी, 
      वरना जीत की क्या औकात जो हमे ठुकरा दे।

26.हमारी अफवाह के धुएं वही से उठते हैं,

    जहाँ हमारे नाम से ही आग लग जाती है।

27.हमे परेशानी उन लोगो से नही है, 
   जो हमे पसन्द नही करते हैं, 
   हमे परेशानी उन लोगो से है
   जो हमे पसन्द करने का दिखावा करते हैं।

28.अगर शेर के पंजे में कांटा चुभ जाए,
     तो इसका मतलब ये नही की अब राज़ कुत्ते करेंगे।

 29. माना की तू शेर है, 
       पर ज्यादा उछल मत, 
       हम भी शिकारी हैं ठोक देंगे।

30.मुझे फर्क नही पड़ता, मेरी चाहे तारीफ करो,

    या मुझे बदनाम करो, लेकिन जो भी करो 
               वो खुल कर शरेआम करो।




Love

1.हज़ार बार ली है तुमने तलाशी मेरे दिल की,
बताओ कभी कुछ मिला है इसमें प्यार के सिवा

2.आपकी परछाई हमारे दिल में है,
आपकी यादें हमारी आँखों में हैं,
आपको हम भुलाएं भी कैसे,
आपकी मोहब्बत हमारी सांसो में हैं।

3.मेरे  दिल  की  धड़कनो  को
तूने  दिलबर  धड़कना  सीखा  दिया ,
जब  से  मिली  है  मोहब्बत  तेरी  मेरे  दिल  को ,
गम  में  भी  हंसना  सीखा  दिया

4.तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो,
दिल मेरा था और धड़क रहा था वो।
प्यार का ताल्लुक भी अजीब होता है,
आंसू मेरे थे और सिसक रहा था वो।

5.काश इक दिन ऐसा भी आये हम तेरी बाहों में समा जाएँ,
सिर्फ हम हो और तुम हो और वक्त ही ठहर जाए।

6.बडी गुस्ताख है तुम्हारी याद उसे तमीज सिखा दो
दस्तक भी नहीं देती और दिल में उतर जाती है

7.तुम्हारी आँख के आँसू हमारी आँख से निकले
तुम्हे फिर भी शिकायत है मोहब्बत हम नहीं करते

8.सुनो  आँखों  के  पास  नहीं  तो  न  सही
कसम  से  दिल  के  बहोत  पास  हो  तुम

9.हमको ही क्यों देते हो प्यार का इल्जाम 
जरा खुद से भी पूछों इतने प्यारे क्यों हो 

10.तेरी  याद  क्यों  आती  है  ये  मालूम  नहीं
लेकिन  जब  भी  आती  है  अच्छा  लगता  है 


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Monday, July 13, 2020

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ABHISHEK SHIVHARE 
Email id- abhishek.shivhare0786@gmail.com

पर्यावरण

हम सब पर्यावरण के विषय में जानते हैं कि जो भी प्राकृतिक संसाधन इस धरती पर उपलब्ध हैं वे पर्यावरण का ही हिस्सा हैं और सब मिलकर पृथ्वी पर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। इन प्राकृतिक संसाधनों में धरती, वायु, जल, सूर्य का प्रकाश, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आते हैं। इन प्राकृतिक संसाधनों की उपस्थिति से ही धरती पर जीवन संभव है। प्रकृति ने हमें यह पर्यावरण रूपी अमूल्य भेंट प्रदान की है। इस पर्यावरण से ही हमारी जरूरत का सारा सामान उपलब्ध भी होता है। हमें जीवन जीने के लिए जो भी आवश्यक वस्तु चाहिये वह इस पर्यावरण से हमें उपलब्ध होती है। जैसे सांस लेने के लिए हवा (ऑक्सीजन), खाने के लिए अनाज, फल-फूल, सब्जी एवं पीने के लिए पानी। इनमें से किसी एक भी तत्व के बिना मनुष्य एवं जानवरों का जीवित रहना असंभव है। पूरी सृष्टि में मात्र पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जहां पर संतुलित पर्यावरण उपलब्ध है जिसके कारण इस ग्रह पर ही जीवन संभव है।


प्रकृति द्वारा प्रदान की गई इस अमूल्य सौगात को मनुष्य संभाल नहीं पा रहा है। वह अपने स्वार्थ के लिए इसका अंधाधुंध दोहन कर रहा है और साथ ही इसे दूषित भी कर रहा है। इन सबके कारण धीरे-धीरे धरती पर पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और धरती पर कई नई बीमारियों एवं आपदाओं का जन्म हो रहा है। मनुष्य की लापरवाही आगे आने वाली पीढ़ी के लिए धरती को रहने लायक ग्रह न बनाने पर मजबूर कर रही है। पर्यावरण के संतुलन में गड़बड़ी के कारण ही अस्वाभाविक मौसम परिवर्तन जैसे किसी वर्ष बहुत अधिक वर्षा तो किसी वर्ष बिलकुल सूखे की स्थिति, बहुत अधिक ठंड तो कभी बहुत अधिक गर्मी, भूकम्प जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस मौसम परिवर्तन का पूरे पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है जैसे कभी तो फसल ठीक हो जाती है पर कभी सारी बर्बाद, हर मौसम में नई-नई बीमारियाँ जन्म लेती हैं। खेती में रसायनों के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी के पोषक तत्व तो समाप्त हो ही रहे हैं, साथ ही साथ इनसे उगने वाली फसलों का खाकर इंसान बीमारियों का पुतला बनता जा रहा है। इससे पहले कि विज्ञान नई बीमारी का समाधान निकाले कोई दूसरी बीमारी ही जन्म ले लेती है। मनुष्य के स्वार्थ के चलते वायु, भूमि, जल सभी प्रदूषित होते जा रहे हैं और ऐसे पर्यावरण में स्वस्थ रहना तो मुश्किल बल्कि साँस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है।

अब समय आ गया है कि मनुष्य अपने स्वार्थ के कारण प्रकृति की अमूल्य सौगात को नुकसान पहुँचाना बंद कर दे। अनियंत्रित दोहन कर इसे दूषित न करे और प्राकृतिक उपाय अपनाये। यदि मनुष्य ठान ले तो वह कई छोटे-छोटे उपाय अपना कर इस पर्यावरण को बचा सकता है। प्रत्येक शुभ अवसर पर पेड़ लगा कर, पूजा के नाम पर नदियों को दूषित न करके, लकड़ी हेतु वनों की सीमित कटाई करके, खेती में रसायनों का उपयोग न करके आदि। विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास धरती एवं इसमें रहने वाले जीव-जन्तुओं के विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक है पर पर्यावरण की कीमत पर नहीं। हम इन तकनीकों का उपयोग अवश्य करें लेकिन यह भी सुनिश्चित कर लें कि इससे हमारे पर्यावरण को किसी भी प्रकार का ऐसा नुकसान न पहुँचे जिसे सुधारना मुश्किल ही नहीं बल्कि असम्भव हो।

खेल

खेल बहुत अच्छे शारीरिक और मानसिक व्यायाम के लिए सबसे अधिक आसान और आरामदायक तरीका है। यह व्यक्तित्व के वृद्धि तथा विकास के साथ ही देश के लिए भी उपयोगी होता है। हम नियमित रुप से खेलने के लाभ और महत्व को कभी भी अनदेखा नहीं कर सकते हैं। खेल एक व्यक्ति को अच्छी भावना प्रदान करता है और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।

यह हमें हमेशा तंदुरुस्त और स्वस्थ रखने के साथ ही मादक पदार्थों की लत, अपराध और विकारों की समस्याओं से दूर रखता है। सरकार द्वारा बच्चों और विद्यार्थियों को खेलों में भाग लेने के लिए बढ़ावा देने और इनके माध्यम से लोकप्रियता प्रदान करने के लिए खेलों का राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी आयोजन किया जाता है। कई सारे खेल बहुत ही साधारण होते है हालांकि इनमें महारत हासिल करने के लिए नियमित रुप से अभ्यास, ध्यान और मेहनत करने की आवश्यकता होती है।

खेल का प्रभाव

आजकल, एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए खेल एक बहुत ही प्रभावी तरीका है क्योंकि यह सभी के लिए समान और अच्छी नौकरी के अवसरों का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके द्वारा खेल गतिविधियों का आयोजन करने वाले देश के अर्थव्यवस्था को बढ़ावा भी बढ़ावा मिलता है। अंतराष्ट्रीय खेल गतिविधियों में जीतने पर यह विजेता देश के नागरिकों को गर्वान्वित भी महसूस कराता है।

यह हमें प्रोत्साहित करने के साथ ही हममें देशभक्ति की भावना को भी जागृत करता है। खेल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से देशों के बीच तनावों का कम करने का भी एक कारगर तरीका है। यह व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक शक्ति को सुधारने में मदद करने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक मजबूती में भी सुधार लाता है।

निष्कर्ष

हमें बच्चों को खेलों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और घर तथा स्कूली स्तर पर शिक्षकों और अभिभावकों की समान भागीदारी के द्वारा उनकी खेलों में रुचि का निर्माण करना चाहिए। आज के समय में खेल बहुत ही रुचिकर हो गए हैं और किसी के भी द्वारा किसी भी समय खेले जा सकते हैं हालांकि, पढ़ाई तथा अन्य लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए इनका बचपन से ही अभ्यास होना चाहिए।

नारी शिक्षा


नारी के विषयों में हमारे विद्वानों और विचारकों ने अलग अलग विचार प्रस्तुत किए हैं। गोस्वामी तुलसीदान ने नारी के अन्तर्गत बहुत प्रकार के दोषों की गणना की थी। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा कहा गया नारी का सद्चरित्र और उज्जवल चरित्र का उदघाटन नहीं करता है, अपितु इससे नारी के दुष्चरित्र पर ही प्रकाश पड़ता है। गोस्वामी तुलसीदास ने साफ साफ कहा था कि नारी में आठ अवगुण सदैव रहते हैं। उसमें साहस, चपलता, झूठापन, माया, भय, अविवेक, अपवित्रता और कठोरता खूब भरी होती है। चाहे कोई भी नारी क्यों न होये

साहस, अनृत, चपलता, माया।
भय, अविवेक, असौच, अदाया।।

इसीलिए तुलसीदास ने नारी को पीटने के लिए कहा-

ढोल, गंवार, शुद्र, पशु, नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी।।

अगर तुलसीदास ने मनुस्मृति की उस शिक्षा पर ध्यान दिया होता, तो वे ऐसी कठारे वाणी का प्रयोग न करते। मनु महाराज संसार के सच्चे चिन्तक थे। इसलिए उन्होंने मानवता को सबसे पहले महत्व और स्थान दिया था। नारी को ऋद्धापूर्वक देखते हुए उसे देवी के रूप में मान्यता प्रदान की थी-

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः।

अर्थात् जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवगण निवास करते हैं। इसी से प्रभावित होकर कविवर जयशंकर प्रसाद ने कहा था-

नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में।
पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुन्दर समतल में।।

इतना होने पर भी नारी के प्रति अन्याय और शोषण कार्य चलता रहा, जिसे देख करके महान राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा-

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी।
आँचल में है दूध और आँखों में पानी।।

नारी के प्रति उपेक्षा का क्या कारण रहा? इसके उत्तर में हम यह कह सकते हैं कि हमने अपने शास्त्र, अपनी संस्कृति सभ्यता आदि को एकदम भुल दिया और अन्धानुकरण से हमने काम लिया। हमने नारी के गुणों को पहचानने की कोशिश नहीं की। हमने यह समझा कि नारी एक परम मित्र और मंत्रणा की प्रतिमूर्ति है। वह पति के लिए दासी के समान सच्ची सेवा करने वाली है। माता के समान जीवन देने वाली अर्थात् रक्षा करने वाली है। रमण करने के लिए पत्नी है। धर्म के अनुकूल कार्य करने वाली है। पृथ्वी के समान क्षमाशील है।

आज के युग में नारी कितनी सुशील और शिष्ट क्यों न हो, अगर वह शिक्षित नहीं है, तो उसका व्यक्तित्व बड़ा नहीं हो सकता है, क्योंकि आज का युग प्राचीन काल को बहुत पीछे छोड़ चुका है। आज नारी पर्दा और लज्जा की दीवारों से बाहर आ चुकी है, वह पर्दा प्रथा से बहुत दूर निकल चुकी है। इसलिए आज इस शिक्षा युग में अगर नारी शिक्षित नहीं है, तो उसका इस युग से कोई तालमेल नहीं हो सकता है। ऐसा न होने से वह महत्वहीन समझी जायेंगी और इस तरह समाज से उपेक्षा का पात्र बन जाएगी। इसलिए आज नारी को शिक्षित करने की तीव्र आश्वयकता को समझकर इस पर ध्यान दिया जा रहा है।

नारी शिक्षा का महत्व निर्विवाद रूप से मान्य है। यह बिना किसी तर्क या विचार विमर्श के ही स्वीकार करने योग्य है, क्योंकि नारी शिक्षा के परिणामस्वरूप ही पुरूष के समान आदर और सम्मान का पात्र समझी जाती है। यह तर्क किया जा सकता है कि प्राचीनकाल में नारी शिक्षित नहीं होती थी। वह गृहस्थी के कार्यों में दक्ष होती हुई पतिपरायण और महान पतिव्रता होती थी। इसी योग्यता के फलस्वरूप वह समाज से प्रतिष्ठित होती हुई देवी के समान श्रद्धा और विश्वास के रूप में देखी जाती थी, लेकिन हमें यह सोचना विचारना चाहिए कि तब के समय में नारी शिक्षा की कोई आश्वयकता न थी। तब नारी नर की अनुगामिनी होती थी। यही उसकी योग्यता थी, जबकि आज की नारी की योग्यता शिक्षित होना है।

आज का युग शिक्षा के प्रचार प्रसार से पूर्ण विज्ञान का युग है। आज अशिक्षित होना एक महान अपराध है। शिक्षा के द्वारा ही पुरूष किसी भी क्षेत्र में जैसे प्रवेश करते हैं, वैसे नारी भी शिक्षा से सम्पन्न होकर जीवन के किसी भी क्षेत्र में प्रवेश करके अपनी योग्यता और प्रतिभा का परिचय दे रही है।

शिक्षित नारी में आज पुरूष की शक्ति और पुरूष का वही अद्भुत तेज दिखाई पड़ता है। शिक्षित नारी जब घर की चारदीवारी से निकल समाज मे समानाधिकार को प्राप्त कर रही है। वह अपनी प्रतिभा और शक्ति से कहीं कहीं महत्वपूर्ण और प्रभावशाली दिखाई देती है। नारी शिक्षित होने के फलस्वरूप आज समाज के एक से एक ऐसे बड़े उत्तरदायित्व का निर्वाह कर रही है, जो पुरूष भी नहीं कर सकता। शिक्षित नारी आजकल के सभी क्षेत्रों में पदार्पण कर चुकी है। वह एक महान् नेता, समाज सेविका, चिकित्सक, निदेशक, वकील, अध्यापिका, मन्त्री, प्रधानमंत्री आदि महान पदों पर कुशलतापूर्वक कार्य करके अपनी अद्भुत क्षमता को दिखा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि वह इन पदों की कठिनाइयों का सामना करती हुई भी अपनी प्रतिभा का परिचय देती है और अपनी दिलेरी को दिखा रही है।

शिक्षित नारी में आत्म निर्भरता का गुण उत्पन्न होता है। वह स्वावलम्ब के गुणों से युक्त होकर पुरूष को चुनौती देती है। अपने स्वावलम्बन के गुणों के कारण ही नारी पुरूष की दासी या अधीन नहीं रहती है, अपितु वह पुरूष के समान ही स्वतंत्र और स्वछन्द होती है। शिक्षित होने के कारण ही आज नारी समाज में पूर्णरूप से सुरक्षित है। शिक्षित नारी आज के समाज का अत्याचार नहीं सहती है या आज समाज नारी पर कोई अत्याचार नहीं करता है। शिक्षित नारी के प्रति ब्याज दहेज का कोई शोषण चक्र नहीं चलता है। शिक्षित नारी को आज सती प्रथा का कोई कोप नहीं सहना पड़ता है। शिक्षा के कारण ही आज वह न केवल पुरूष से ही नहीं, अपितु समाज से भी मंडित और समादूत है।